(व्रत के प्रभाव से निर्धनता का नाश और सौभाग्य की प्राप्ति)
📜 सूतजी का कथन – प्रथम व्रती का इतिहास
सूत जी बोले—
हे ऋषियों! जिसने प्राचीन काल में सर्वप्रथम इस व्रत को किया था, उसका पवित्र इतिहास अब मैं तुमसे कहता हूँ।
आप सभी ध्यानपूर्वक सुनिए।
🏙️ काशी नगरी का निर्धन ब्राह्मण
सुंदर काशीपुरी नगरी में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण रहता था।
वह भूख और प्यास से व्याकुल होकर भिक्षा के लिए पृथ्वी पर भटकता रहता था।
ब्राह्मणों से प्रेम करने वाले भगवान ने एक दिन स्वयं ब्राह्मण का वेश धारण किया और उसके समीप जाकर पूछा, हे विप्र! तुम नित्य दुखी होकर इस प्रकार क्यों घूमते रहते हो?
😔 दीन ब्राह्मण की व्यथा
दीन ब्राह्मण बोला—
मैं एक निर्धन ब्राह्मण हूँ।
भिक्षा के लिए पृथ्वी पर घूमता हूँ।
हे भगवान!
यदि आप इस दुख से मुक्ति का कोई उपाय जानते हों, तो कृपया बताइए।
👴 वृद्ध ब्राह्मण के रूप में भगवान का उपदेश
वृद्ध ब्राह्मण के रूप में आए भगवान बोले—
सत्यनारायण भगवान मनोवांछित फल देने वाले हैं।
तुम उनका श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजन करो।
इस व्रत को करने से मनुष्य सभी दुखों से मुक्त हो जाता है।
इतना कहकर वृद्ध ब्राह्मण रूपी भगवान उस निर्धन ब्राह्मण को व्रत का पूरा विधान समझाकर अंतर्धान हो गए।
🌙 ब्राह्मण का संकल्प और रात्रि की व्याकुलता
ब्राह्मण मन ही मन विचार करने लगा—
जिस व्रत का उपदेश वृद्ध ब्राह्मण देकर गए हैं,
मैं उसे अवश्य करूँगा।
इस निश्चय के कारण उसे उस रात नींद नहीं आई।
🌅 व्रत का निश्चय और अद्भुत दान
प्रातःकाल उठकर उसने श्री सत्यनारायण भगवान का व्रत करने का दृढ़ संकल्प किया और भिक्षा के लिए निकल पड़ा।
उस दिन उसे भिक्षा में पहले से कहीं अधिक धन प्राप्त हुआ।
🪔 प्रथम सत्यनारायण व्रत का संपन्न होना
प्राप्त धन से उसने अपने बंधु-बांधवों के साथ मिलकर विधिपूर्वक श्री सत्यनारायण भगवान का व्रत संपन्न किया।
🌼 व्रत का फल – निर्धनता से ऐश्वर्य तक
व्रत पूर्ण होते ही वह ब्राह्मण—
- सभी दुखों से मुक्त हो गया
- धन-धान्य और संपत्ति से युक्त हो गया
तब से वह ब्राह्मण प्रत्येक मास श्रद्धापूर्वक यह व्रत करने लगा।
🌸 सूतजी का फल-श्रवण
सूत जी बोले
जो मनुष्य श्रद्धा से श्री सत्यनारायण भगवान का व्रत करता है,
वह सभी पापों से मुक्त होकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
इस व्रत को करने वाला कोई भी व्यक्ति दुखी नहीं रहता।
❓ ऋषियों की जिज्ञासा
ऋषियों ने कहा
हे मुनिवर!
उस विप्र के अतिरिक्त और किन-किन लोगों ने इस व्रत को किया?
हम सब यह कथा आगे सुनना चाहते हैं।
📖 सूतजी का उत्तर – अन्य भक्तों की कथा
सूत जी बोले—
हे मुनियों!
अब उन सभी की कथा सुनो, जिन्होंने इस व्रत को किया।
🪵 लकड़हारे का आगमन
एक समय वही विप्र अपने धन और ऐश्वर्य के अनुसार बंधु-बांधवों सहित सत्यनारायण व्रत करने को तैयार हुआ।
उसी समय एक वृद्ध लकड़हारा लकड़ियाँ बेचते हुए वहाँ आया।
प्यास से व्याकुल वह ब्राह्मण के घर के भीतर गया।
🙏 लकड़हारे का प्रश्न
व्रत होते देखकर उसने विप्र को प्रणाम किया और पूछा—
आप यह कौन-सा कर्म कर रहे हैं?
और इसे करने से क्या फल प्राप्त होता है?
कृपया मुझे भी बताइए।
🌺 विप्र द्वारा व्रत का महत्त्व
ब्राह्मण ने कहा—
यह श्री सत्यनारायण भगवान का व्रत है,
जो सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करता है।
इसी व्रत की कृपा से मेरे घर में धन-धान्य की वृद्धि हुई है।
🌿 लकड़हारे का संकल्प
लकड़हारा यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुआ।
उसने चरणामृत लिया, प्रसाद ग्रहण किया और घर जाकर संकल्प किया—
आज लकड़ी बेचकर जो धन मिलेगा,
उसी से मैं श्री सत्यनारायण भगवान का व्रत करूँगा।
💰 चार गुना मूल्य का चमत्कार
लकड़हारा उस नगर में लकड़ियाँ बेचने गया जहाँ धनी लोग रहते थे।
वहाँ उसकी लकड़ियाँ पहले से चार गुना मूल्य में बिक गईं।
🪔 लकड़हारे का सत्यनारायण व्रत
प्रसन्न होकर वह
- केले
- शक्कर
- घी
- दूध
- दही
- गेहूँ का आटा
तथा अन्य पूजन सामग्री लेकर घर पहुँचा।
उसने बंधु-बांधवों को बुलाकर विधिपूर्वक श्री सत्यनारायण भगवान का व्रत किया।
🌈 व्रत का फल – भक्ति से वैकुंठ
इस व्रत के प्रभाव से वह वृद्ध लकड़हारा—
- धन
- पुत्र
- सुख-समृद्धि
से युक्त हुआ और जीवन के अंत में वैकुंठ धाम को प्राप्त हुआ।
📿 द्वितीय अध्याय की पूर्णाहुति
॥ इति श्री सत्यनारायण व्रत कथा का द्वितीय अध्याय संपूर्ण ॥
🙏 मंगलाचरण
श्रीमन्न नारायण – नारायण – नारायण
भज मन नारायण – नारायण – नारायण
श्री सत्यनारायण भगवान की जय!
अगले अध्याय पढ़ें
श्री सत्यनारायण व्रत कथा – प्रथम अध्याय Shree Satyanarayan Vrat Katha
श्री सत्यनारायण व्रत कथा – तृतीय अध्याय Shree Satyanarayan Vrat Katha
श्री सत्यनारायण व्रत कथा – चतुर्थ अध्याय Shree Satyanarayan Vrat Katha
श्री सत्यनारायण व्रत कथा – पंचम अध्याय Shree Satyanarayan Vrat Katha
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