भगवान शिव देवों के देव हैं और उन्हें प्रसन्न करना मतलब सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को प्रसन्न करना है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई सारे मंत्र हैं जिनमे महामृत्युंजय मंत्र और शिव आरती, शिव चालीसा इत्यादि का नियमित पाठ किया जाता है। प्रस्तुत है शिव चालीसा जिसका सुबह शाम पाठ करना भक्तों को शुभ फल प्रदान करता है।
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥
मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥
मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥
धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥
नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. शिव चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
शिव चालीसा का पाठ प्रातःकाल या संध्या समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। इसके अलावा सोमवार, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के दिन इसका विशेष महत्व है।
2. क्या शिव चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?
हाँ बिल्कुल, शिव चालीसा का नित्य पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से मन शांत होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
3. शिव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
शिव चालीसा का श्रद्धा से पाठ करने पर भय, तनाव और नकारात्मकता कम होती है। यह आत्मविश्वास, मानसिक शांति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में सहायक है।
4. क्या महिलाएँ शिव चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, शिव चालीसा सभी भक्तों के लिए समान रूप से उपयोगी है — स्त्री, पुरुष या बच्चे। भक्ति में कोई भेद नहीं होता।
5. क्या शिव चालीसा बिना स्नान के पढ़ सकते हैं?
अगर संभव हो तो स्नान के बाद पाठ करें, परंतु सच्ची भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। अगर कोई व्यक्ति बीमार हो तो स्वच्छ मन से किया गया पाठ भी फलदायी होता है।
6. क्या शिव चालीसा सुनने से भी लाभ मिलता है?
जी हाँ, शिव चालीसा को श्रद्धा से सुनना भी उतना ही प्रभावी माना गया है। जो लोग पढ़ नहीं पाते, वे सुनकर भी शिव कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
🕉️ निष्कर्ष (Conclusion)
शिव चालीसा केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक अचूक उपाय है। इसके प्रत्येक शब्द में भक्ति, शक्ति और शांति का स्पंदन है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पाठ महादेव की कृपा का पात्र बनता है। हर हर महादेव।
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