होलिका और प्रह्लाद की कथा Holika and Prahlad story in Hindi

भारतीय संस्कृति में हर पर्व केवल एक उत्सव नहीं होता, बल्कि वह जीवन को देखने की दृष्टि देता है। होली भी ऐसा ही पर्व है — बाहर से रंगों, हँसी और उल्लास का, पर भीतर से धर्म की विजय और अधर्म के पतन का प्रतीक।
इस पर्व के मूल में छिपी है एक ऐसी कथा, जो हर युग में उतनी ही प्रासंगिक है जितनी सतयुग में थी — होलिका और प्रह्लाद की कथा

यह कथा केवल एक बालक और एक राक्षसी की नहीं, बल्कि अहंकार बनाम भक्ति, सत्ता बनाम सत्य, और डर बनाम विश्वास की कथा है।

हिरण्यकश्यप: जब अहंकार स्वयं को ईश्वर समझ बैठा

बहुत समय पहले की बात है। पृथ्वी पर हिरण्यकश्यप नाम का एक शक्तिशाली असुर राजा राज्य करता था। उसने कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि—

  • वह न दिन में मरे, न रात में
  • न घर के भीतर मरे, न बाहर
  • न किसी मनुष्य द्वारा मरे, न पशु द्वारा
  • न अस्त्र से मरे, न शस्त्र से

इस वरदान ने उसके भीतर यह भ्रम भर दिया कि वह अजेय है। धीरे-धीरे यह भ्रम अहंकार में बदल गया, और अहंकार ने उसे यह मानने पर विवश कर दिया कि वही ईश्वर है।

उसने अपने राज्य में आदेश जारी कर दिया —

“मेरे अतिरिक्त कोई और भगवान नहीं है। मेरी ही पूजा होगी।”

प्रह्लाद: भक्ति का जन्म बचपन में

विडंबना देखिए कि उसी हिरण्यकश्यप का पुत्र था प्रह्लाद — जो बचपन से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था।

प्रह्लाद की भक्ति किसी मजबूरी से नहीं थी। वह सहज, निर्मल और भय से मुक्त थी। जब गुरुकुल में उससे पूछा गया — “सबसे श्रेष्ठ क्या है?” प्रह्लाद ने उत्तर दिया — “भगवान विष्णु की भक्ति।” यह उत्तर उसके पिता तक पहुँचा… और वहीं से आरंभ हुआ एक पिता और पुत्र के बीच सबसे भयावह संघर्ष

जब सत्ता, सत्य से टकराती है

हिरण्यकश्यप ने पहले प्रह्लाद को समझाने का प्रयास किया। फिर धमकाया, फिर दंड दिया लेकिन प्रह्लाद की भक्ति डगमगाई नहीं। उसे ऊँचे पहाड़ से गिराया गया वह बच गया। उसे विष पिलाया गया वह अमृत बन गया।

उसे हाथियों के पैरों तले कुचलवाया गया हाथी रुक गए। हर बार प्रह्लाद के मुख से एक ही नाम निकला “नारायण… नारायण…” यह देखकर हिरण्यकश्यप का क्रोध विकराल रूप ले चुका था।

होलिका: वरदान और उसका अहंकार

हिरण्यकश्यप की बहन थी — होलिका। उसे वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी

लेकिन वरदान भी तभी तक रक्षा करता है, जब तक उसके साथ धर्म जुड़ा हो। होलिका को अपने वरदान पर घमंड था।
उसे लगा कि वह भक्ति को जला देगी। हिरण्यकश्यप ने आदेश दिया — “प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ जाओ।”

अग्नि-परीक्षा: जहाँ सत्य जलता नहीं

होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। चारों ओर लपटें उठने लगीं। लोगों को लगा — आज भक्ति का अंत हो जाएगा। लेकिन हुआ ठीक उल्टा। 🔥 अग्नि ने धर्म को नहीं, अधर्म को जलाया। होलिका जलकर राख हो गई।
प्रह्लाद सुरक्षित बाहर आ गया। उस क्षण संसार ने देखा —

भक्ति अग्नि से नहीं जलती,
अग्नि स्वयं भक्ति में विलीन हो जाती है।

यही घटना होलिका दहन के रूप में अमर हो गई।

नरसिंह अवतार: अहंकार का अंतिम अंत

जब हिरण्यकश्यप ने यह सब देखा, तो वह उन्मत्त हो उठा। उसने प्रह्लाद से पूछा “अगर तुम्हारा भगवान हर जगह है, तो क्या इस स्तंभ में भी है?” प्रह्लाद ने शांत स्वर में कहा “हाँ, वे हर जगह हैं।”

हिरण्यकश्यप ने स्तंभ पर प्रहार किया। और उसी क्षण प्रकट हुए भगवान नरसिंह न मनुष्य, न पशु।

उन्होंने संध्या के समय, दरवाज़े की चौखट पर, अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का अंत किया। वरदान की हर शर्त पूरी हुई। अहंकार टूट गया।

होली: केवल रंग नहीं, पुनर्जन्म का पर्व

होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है होली। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं है। यह…

  • पुराने वैर को जलाने का पर्व है
  • मन के मैल को धोने का पर्व है
  • जीवन को नए रंग देने का पर्व है

जैसे प्रह्लाद हर कष्ट के बाद और अधिक उज्ज्वल हुआ,
वैसे ही मनुष्य भी हर संघर्ष के बाद
और अधिक रंगीन हो सकता है।

आज के जीवन में प्रह्लाद

आज हिरण्यकश्यप कोई एक व्यक्ति नहीं है। वह…

  • अहंकार है
  • नकारात्मकता है
  • डर है
  • स्वार्थ है

और प्रह्लाद? वह…

  • विश्वास है
  • धैर्य है
  • आत्मबल है
  • सच्चाई है

हर इंसान के भीतर एक होलिका और एक प्रह्लाद दोनों रहते हैं।

निर्णय हमें करना है की किसे अग्नि में जलाना है।

हमारा संदेश

Bhakti Ocean पर हम केवल कथाएँ नहीं सुनाते, हम जीवन की दिशा देते हैं।

होलिका और प्रह्लाद की कथा हमें सिखाती है…

  • ईश्वर बाहर नहीं, भीतर बसते हैं
  • सच्ची भक्ति न डरती है, न झुकती है
  • सत्य देर से सही, पर जीतता अवश्य है

2026 में होली कब है?

📅 होलिका दहन – मंगलवार, 3 मार्च 2026 (रात्रि)
🌈 रंगवाली होली – बुधवार, 4 मार्च 2026

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