भारत त्योहारों का देश है। यहाँ हर पर्व केवल उत्सव नहीं होता, बल्कि उसके पीछे गहरी आस्था, परंपरा, प्रकृति से जुड़ाव और जीवन-दर्शन छिपा होता है। इन्हीं पावन पर्वों में से एक है तीज। तीज विशेष रूप से महिलाओं का त्योहार माना जाता है, जो सावन मास में बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न होता है कि तीज क्यों मनाया जाता है, इसकी शुरुआत कैसे हुई, और इसका वास्तविक अर्थ क्या है?
इस लेख में हम तीज से जुड़े धार्मिक कारणों, पौराणिक कथाओं, सांस्कृतिक महत्व, व्रत विधि और आधुनिक समय में इसके स्वरूप को विस्तार से समझेंगे।
तीज क्या है?
तीज मुख्य रूप से श्रावण मास में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। तीज का सीधा संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ा हुआ है।
तीज को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से जाना जाता है, जैसे—
- हरियाली तीज
- कजरी तीज
- हरतालिका तीज
हालाँकि रूप अलग हो सकते हैं, लेकिन भाव और उद्देश्य लगभग एक ही रहता है—
वैवाहिक सुख, पति की दीर्घायु और सौभाग्य की कामना।
तीज क्यों मनाया जाता है? (धार्मिक कारण)
माता पार्वती की तपस्या की कथा
तीज मनाए जाने के पीछे सबसे प्रमुख कारण माता पार्वती की कठोर तपस्या मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार—
माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कई जन्मों तक कठोर तप किया। उन्होंने अन्न-जल तक का त्याग कर दिया और वर्षों तक तपस्या में लीन रहीं। माता पार्वती की यह तपस्या श्रावण मास की तृतीया तिथि को पूर्ण हुई, जब भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
इसी कारण यह पर्व स्त्री की आस्था, धैर्य, प्रेम और संकल्प शक्ति का प्रतीक बन गया।
हरतालिका तीज का विशेष महत्व
हरतालिका तीज तीज पर्व का सबसे कठोर और महत्वपूर्ण रूप माना जाता है।
हरतालिका का अर्थ
- हरत = हरण करना
- आलिका = सखी
कथा के अनुसार माता पार्वती की सखियाँ उन्हें पिता के घर से “हरण” करके वन में ले गईं, ताकि वे शिव जी की तपस्या कर सकें। इसलिए इस व्रत को हरतालिका तीज कहा गया।
इस दिन महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं—
अर्थात बिना जल और अन्न के पूरा दिन व्रत।
तीज का सांस्कृतिक महत्व
स्त्री जीवन से जुड़ा पर्व
तीज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्त्री जीवन का उत्सव है। यह पर्व महिलाओं को—
- अपनी भावनाएँ व्यक्त करने
- मायके जाने
- पारंपरिक गीत गाने
- झूला झूलने
- सोलह श्रृंगार करने
का अवसर देता है।
लोकगीत और झूले
सावन के मौसम में चारों ओर हरियाली होती है। पेड़ों पर झूले पड़ते हैं और महिलाएँ तीज के लोकगीत गाती हैं। ये गीत—
- प्रेम
- विरह
- सौभाग्य
- स्त्री की पीड़ा और आशा
को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करते हैं।
तीज और प्रकृति का संबंध
तीज का गहरा संबंध प्रकृति और ऋतु परिवर्तन से भी है।
- सावन में वर्षा होती है
- धरती हरी-भरी हो जाती है
- किसान के लिए यह नई उम्मीद का समय होता है
तीज स्त्री और प्रकृति के बीच के आंतरिक संबंध को दर्शाता है। जैसे धरती वर्षा से फलती-फूलती है, वैसे ही स्त्री का जीवन प्रेम और विश्वास से पूर्ण होता है।
तीज व्रत करने का उद्देश्य
तीज व्रत के मुख्य उद्देश्य हैं—
- पति की लंबी उम्र की कामना
- वैवाहिक जीवन में सुख-शांति
- अविवाहित कन्याओं के लिए योग्य वर की प्राप्ति
- गृहस्थ जीवन में स्थिरता
- आत्मसंयम और साधना
यह व्रत स्त्री को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है।
तीज व्रत की विधि (संक्षेप में)
व्रत से पूर्व
- एक दिन पहले श्रृंगार और साज-सज्जा
- व्रत कथा सुनने की तैयारी
- पारंपरिक पकवान बनाना
व्रत के दिन
- प्रातः स्नान
- शिव-पार्वती की पूजा
- निर्जला उपवास
- कथा श्रवण
- रात्रि में जागरण
व्रत पारण
अगले दिन पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।
तीज में सोलह श्रृंगार का महत्व
तीज के दिन महिलाएँ सोलह श्रृंगार करती हैं, जैसे—
- मेहंदी
- चूड़ियाँ
- सिंदूर
- बिंदी
- काजल
यह श्रृंगार केवल बाहरी सजावट नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्त्रीत्व का प्रतीक है।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में तीज
राजस्थान
- तीज का भव्य जुलूस
- देवी पार्वती की सवारी
- लोकनृत्य और मेले
उत्तर भारत
- हरतालिका तीज का विशेष महत्व
- निर्जला व्रत की परंपरा
बिहार और झारखंड
- कजरी तीज
- कजरी लोकगीत
आधुनिक समय में तीज का स्वरूप
आज के समय में तीज का रूप थोड़ा बदल गया है, लेकिन उसका मूल भाव आज भी जीवित है।
- महिलाएँ कार्यस्थल और परिवार दोनों संभालते हुए व्रत करती हैं
- सोशल मीडिया पर तीज की शुभकामनाएँ
- लेकिन फिर भी पूजा, व्रत और कथा का महत्व बना हुआ है
यह पर्व आज भी महिलाओं को भावनात्मक संबल और पहचान देता है।
तीज से मिलने वाली सीख
तीज हमें सिखाता है—
- धैर्य और समर्पण
- रिश्तों का सम्मान
- आत्मसंयम
- प्रकृति से जुड़ाव
- प्रेम में विश्वास
यह पर्व केवल पति के लिए नहीं, बल्कि स्वयं के मन और आत्मा की शुद्धि का माध्यम भी है।
निष्कर्ष
तीज क्यों मनाया जाता है, इसका उत्तर केवल एक वाक्य में नहीं दिया जा सकता। यह पर्व—
- श्रद्धा है
- प्रेम है
- स्त्री शक्ति का उत्सव है
- संस्कृति की आत्मा है
तीज हमें याद दिलाता है कि भारतीय परंपराएँ केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। आज के आधुनिक युग में भी तीज का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि यह और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है—जहाँ स्त्री अपने कर्तव्यों, सपनों और आस्था के बीच संतुलन बनाती है।
उद्देश्य
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