काल भैरव अष्टक स्तोत्र Kaal Bhairav Ashtak Stotra

सनातन परंपरा में काल भैरव को भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप माना गया है। वे केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा, भय का नाश और मोक्ष का मार्ग दिखाने वाले महादेव हैं। काशी नगरी के अधिपति माने जाने वाले काल भैरव को “काल के भी काल” कहा गया है, जिनकी कृपा से समय, कर्म और मृत्यु का भय नष्ट होता है।

काल भैरव अष्टक स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना आदिगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा की गई मानी जाती है। इस अष्टक के प्रत्येक श्लोक में काल भैरव के अलग-अलग गुणों, उनकी दिव्यता, उग्रता और करुणा का सुंदर वर्णन है। श्रद्धा और नियम से इसके पाठ से भय, शोक, नकारात्मक ऊर्जा, पाप और बाधाओं का नाश होता है तथा साधक को आत्मबल, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

विशेष रूप से यह अष्टक शनिवार, कालाष्टमी, अमावस्या या काशी दर्शन के समय पाठ करने पर अत्यंत फलदायी माना गया है।

|| काल भैरव अष्टक स्तोत्र ||


।श्री गणेशाय नमः।

देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् ।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥

शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥ ४॥

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशनं कर्मपाशमोचकं सुशर्मधायकं विभुम् ।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभितांगमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ५॥

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम् ।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ६॥

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं दृष्टिपात्तनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ७॥

भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ८॥

॥ फल श्रुति॥

कालभैरवाष्टकं पठंति ये मनोहरं ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम् ।
शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं प्रयान्ति कालभैरवांघ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम् ॥

॥इति कालभैरवाष्टकम् संपूर्णम् ॥

काल भैरव अष्टक केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि जीवन के भय और अज्ञान से मुक्त होने का आध्यात्मिक मार्ग है। इसके नियमित पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और साधक को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

जो भक्त श्रद्धा, विश्वास और संयम के साथ इस अष्टक का पाठ करता है, वह काल भैरव की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – चारों पुरुषार्थों की ओर अग्रसर होता है। अंततः साधक को भगवान काल भैरव के चरणों की सन्निधि प्राप्त होती है, जहाँ भय नहीं, केवल शांति और प्रकाश है।

🙏 Bhakti Ocean की ओर से प्रार्थना है कि भगवान काल भैरव आप सभी के जीवन से कष्ट, भय और अंधकार को दूर करें और आपको साहस, विवेक व संरक्षण प्रदान करें।
जय श्री काल भैरव!

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